हुनर हांसिल नही होता है हतियाने से
राही मंजिल प् नही सकता राह बताने से
मंजिल तो मिलती है कुछ कर गुजर जाने से
शुकून मिलता नही है कभी राहो में बैठ जाने से
कुछ नही मिलता है तन को चमकाने से
बात तो बनती है मन को चमकाने से
भगत
राही मंजिल प् नही सकता राह बताने से
मंजिल तो मिलती है कुछ कर गुजर जाने से
शुकून मिलता नही है कभी राहो में बैठ जाने से
कुछ नही मिलता है तन को चमकाने से
बात तो बनती है मन को चमकाने से
भगत
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