हमे जो हँसाता है
हमारे दिल को भा जाता है .......
हमारी संश्क्र्ती को दांव पे लगाता है
हमारी रग-रग में बस जाता है .........
हर कोई उसके ही गीत गाता है
हम पे ऐसा जादू चलता है..........
हर आदमी अपनी मर्यादा भूल जाता है
एक वो है जो हमे अपनी जान.....
दांव पे लगाकर बचाता है
सर्दी गर्मी बारीस का ही होके रह जाता है .........
हमारे दिल को भा जाता है .......
हमारी संश्क्र्ती को दांव पे लगाता है
हमारी रग-रग में बस जाता है .........
हर कोई उसके ही गीत गाता है
हम पे ऐसा जादू चलता है..........
हर आदमी अपनी मर्यादा भूल जाता है
एक वो है जो हमे अपनी जान.....
दांव पे लगाकर बचाता है
सर्दी गर्मी बारीस का ही होके रह जाता है .........
घर की चोखट भूल जाता है
हमारे लीये अँधा होके ही रह जाता है ........
न बहन से राखी बंधा पाता है
न होली खा पाता न ही दीवाली........
बस उसे फीकर हमारी रहती है
हमे इनकी याद भी नही आती है .........
वो हमारे लीये कितने गये
वो लाखो गये और जाते है हर रोज .................
भगत
हमारे लीये अँधा होके ही रह जाता है ........
न बहन से राखी बंधा पाता है
न होली खा पाता न ही दीवाली........
बस उसे फीकर हमारी रहती है
हमे इनकी याद भी नही आती है .........
वो हमारे लीये कितने गये
वो लाखो गये और जाते है हर रोज .................
भगत
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