Friday, 17 August 2012

जा पाले उन बुलन्दियो को 
ये मेरी दुआ हैं 
भगत
हर किसी को ये कहने से सिद्ध नही होता की में इमानदार हु वफादार हु 
ये बाते हमारे मुख को सोभा नही देती हैं 
हम क्या हैं ये हम नही जानते हैं ये हम से बेहतर वो जानते हैं 

भगत सिंह बेनी
कहाँ हैं आज वो दादी -नानी 
जो रातो को कहती थी हमे कहानी 
वो रातो की हंसी वो आँखों का पानी 
आज तो माता- मोशी सुनती हैं हमे कहानी 
FACEBOOK की जुबानी COLORS की कहानी 
ना रही वो हंसी ना ही वो आँखों का पानी 

भगत सिंह बेनीवा
बारीश से ज्यादा खून बरसता है आज मेरे देश में 
दूध से भी सस्ता हो गया है खून मेरे देश में 

भगत सिंह बेनीवाल
बारीश से ज्यादा खून बरसता है आज मेरे देश में 
दूध से भी सस्ता हो गया है खून मेरे देश में 

भगत सिंह बेनीवाल
बारीश से ज्यादा खून बरसता है आज मेरे देश में 
दूध से भी सस्ता हो गया है खून मेरे देश में 

भगत सिंह बेनीवाल
आप ये चाहे की सभी के साथ आपके रिश्ते मधुर हो और मजबूत रहे तो 
आपके लिए बेहतर यही होगा की आप हर रिश्ते से उचीत दुरी बनाये रखे
भगत
आप ये चाहे की सभी के साथ आपके रिश्ते मधुर हो और मजबूत रहे तो 
आपके लिए बेहतर यही होगा की आप हर रिश्ते से उचीत दुरी बनाये रखे
भगत
बेबस आँखों मे ऐसे ही आंसू 
नही आया करते है..................... 
आपसे होगा यकीनन 
मेरा रिश्ता कोई .......................
हम तस्वीरो की पूजा करके महान नही बन सकते है 
कर्मो की करके जरूर बन सकते है दोस्तों तो हमे 
कर्मो की पूजा ही करनी चाहिए तस्वीरो के सामने टाइम ख़राब नही करना चाहिए 
मेरे देश में किनते लोग राम, हनुमान, गाँधी ,भगत ,गुरुनानक, महात्माबुद्ध बने है 
जिन्होंने कर्मो की पूजा की है वो आज हमसे आगे है 
तभी तो हम कह देते है की इन्सान कर्म से महान होता है जन्म से नही 
भगत
जब एक है मंजिल तो फिर क्यूँ अलग अलग हो रास्ते
एक मैं भी वतन के वास्ते, एक तू भी वतन के वास्ते
जब एक है मंजिल तो फिर क्यूँ अलग अलग हो रास्ते
एक मैं भी वतन के वास्ते, एक तू भी वतन के वास्ते
मुझे आपका साथ क्या मीला 
मैंने तो जीना सीख लिया है 
आप तो बदले या नही बदले मुझे पता नही है 
आपने मुझे जरूर बदल दिया है 
भगत
तेरी शराब के जाम ,
मेरे आंसुओ का इम्ह्तान लेते है,,,, 
ये जो नशा तुझे है वो शराब का नही है, 
मेरे आंसुओ का है, जिसे तुने पानी आँका है ,,,,
भगत
हम चाहते है देश बढे 
हम वापीस दुनिया से आगे बढे 
हम बढे तो देश बढे 
हर कीसी के चेहरे पर मुस्कान खीले
हर एक आँगन में दीपक जले 
हर एक आँगन में तुलसी खीले 
हर कीसी का आँगन हँसे 
माँ बाप को ओलाद का प्यार मिले 
वो चाहते है हम बढे हमारे बढे 
हम चाहते है देश बढे 
भगत
हमे जो हँसाता है
हमारे दिल को भा जाता है .......
हमारी संश्क्र्ती को दांव पे लगाता है 
हमारी रग-रग में बस जाता है .........
हर कोई उसके ही गीत गाता है
हम पे ऐसा जादू चलता है.......... 
हर आदमी अपनी मर्यादा भूल जाता है 
एक वो है जो हमे अपनी जान.....
दांव पे लगाकर बचाता है 
सर्दी गर्मी बारीस का ही होके रह जाता है .........
घर की चोखट भूल जाता है
हमारे लीये अँधा होके ही रह जाता है ........
न बहन से राखी बंधा पाता है
न होली खा पाता न ही दीवाली........
बस उसे फीकर हमारी रहती है
हमे इनकी याद भी नही आती है .........
वो हमारे लीये कितने गये
वो लाखो गये और जाते है हर रोज .................
भगत
हुनर हांसिल नही होता है हतियाने से 
राही मंजिल प् नही सकता राह बताने से 
मंजिल तो मिलती है कुछ कर गुजर जाने से 
शुकून मिलता नही है कभी राहो में बैठ जाने से 
कुछ नही मिलता है तन को चमकाने से 
बात तो बनती है मन को चमकाने से 
भगत
जब किसी पे तरस आता है 
तो मुझे तेरा ही ख्याल क्यों आता है 
तेरा ही नाम महफ़िल में सबसे पहले आता है 
कर कोई छोड़ कर भाग जाता है 
फिर मुझे तुझ पर ही तरस आता है 
भगत
माता-पिता के आँखों की रोशनी है वो
भाई-बहन का सहारा है वो..... 
बच्चो की मंजिल है वो 
पत्नी का आज है वो .....
दोस्तों का प्यारा है वो 
समाज का चिराग है वो .....
हर सजीव का रखवाला है वो 
उपरवाले का मतवाला है वो .....
हुआ आज कुछ यूँ है ....
या तो इन सब ने उसको बदल दिया है 
या खुद बदल गया है वो ......
आज इन सबका हथियारा है वो
वो कोई और नही है इन्सान है ..................
भगत
जब रकम मीले मोटी
तो हर कोई थाली को भेद देता है .....
एक जज मेरे देश में रकम के आगे 
अपनी कुरषी बेच देता है ..........
एक पुलिसवाला सरेयाम 
चोराहे पर अपना इमान बेच देता है ....... 
आज जला देते है उन्ही बेटीयों को 
जिनके लिए एक बाप अपनी किडनी 
बेच देता हैं .............
कभी बहता था उन नदियों में अम्रीत
आज उन्ही नदियों में खून बहता हैं

भगत
हक़ खून मांगता हैं पार्टी नही 
आन्दोलन बलिदान मांगता है 
अनशन नही 
हमे कहना वही चाहिए जो हम कर सके 
समंदर के रही को लहरे देख कर 
रस्ते नही बदलने चाहिए ...........................
भगत
बचपन की कहानी होते हैं दोस्त 
रगों की रवानी होते हैं दोस्त 
जीवन की निशानी होते हैं दोस्त 
हर जुबान की जुबानी होते हैं दोस्त 
जिंदगी की निशानी होते हैं दोस्त 
जिंदगी की कहानी लीखते है दोस्त 
हम तो अपने बारे में कुछ नही जानते है 
हमारे बारे में हमसे ज्यादा जानते हैं दोस्त 

भगत
जीने की वजह बन जाते हैं 
काँटों से हटाकर फूलो की राह दिखाते हैं 
हर परिस्थिति में साथ होते हैं
अपना सब कुछ खो देते हैं हमारे लिए
हमारा नाम कमाते हैं खुद को अपना बताते हैं 
कई तो अगले जन्म में मिलने का वादा करके 
हमसे पहले ही चले जाते हैं
वो दिन बहुत ही याद आते हैं
फिर तो हम भी नही जी पाते हैं
इसीलिए तो जीने की वजह बन जाते हैं
भगत
देश बदले परदेश बदले तो कुछ न बदले 
भेश बदले परिवेश तो भी कुछ न बदले 
अन्न बदले पानी तो भी कुछ न बदले 
रात बदले दिन तो भी कुछ न बदले 
जब बात बदले तो सब कुछ बदले 
मन बदले दिल बदले तो सब कुछ बदले 
जब नियत बदले तो सब कुछ बदले 
फिर तो हम बदले तुम बदले 
भगत
हमने उनको भुला दिया 
उन्हें कोई गम नही ....
हमने उनकी यादों को मिटा दिया 
अपने जहन से उनको कोई गिला नही ....
हमने तो उनके अपनों को 
बेहाल बना दिया ....
किसी को रोटी के लिए
तो किसी को छत के लिए तड.फा दिया .....
जहाँ पे गूंजी थी उनकी
किलकारियां वहां पे गुंडों-
मवालियों को बेठा दिया ......
वो चले थे जिन राहों पे
हमने तो उन राहों को मिटा दिया........
पहले बसते थे वो दिलों में
हमने तस्वीरों पे ला दिया ......
आज उन तस्वीरों को हवा में दिया उडा.
पानी में बहा दिया ....
हमने अपने लिए और अपनों के लिए
उनकी जीवनी और बलिदान को
दांव पे लगा दिया ......
भगत सिंह बेनीवाल
उन्होंने उनको तो पहचान लिया था 
तभी तो वो बगावत पर आये ......
वो उनको पहचान नही पाए थे 
जो कुछ उनके साथ आये और 
कुछ हमारे साथ आये थे ........
जब घर का भेदी लंका ढाए 
जब बार ही खेत को खाए
तो कोन किसको बचाए ........
उनकी क्या ओकात थी
हमे हमारी धरा पर
हाथ लगाने की .........
इतनी भी जल्दी नही थी
उनको जाने की........
आपको जरुरत सर उठाने की
आँखों से पट्टी हटाने की
और चेत जाने की ....
अगर भावना रखते हो
देश के लिए कुछ कर गुजर जाने की ......
सब बातें नही होती हैं बताने की
आप को हर खबर है जमाने की .......
भगत सिंह बेनीवाल

jai hind

जिनके खून से हमे मिला 
ये खुला आसमा ये हवा -पानी
मिला अपना दाना पानी 
याद करो उनकी कुर्बानी
उनकी रगों में खून था 
न की पानी 
हमारे लिए कुर्बान
कर दी अपनी जवानी
आज हम ही भूल
गये उनकी कहानी
भगत