जब रकम मीले मोटी
तो हर कोई थाली को भेद देता है .....
एक जज मेरे देश में रकम के आगे
अपनी कुरषी बेच देता है ..........
एक पुलिसवाला सरेयाम
चोराहे पर अपना इमान बेच देता है .......
आज जला देते है उन्ही बेटीयों को
जिनके लिए एक बाप अपनी किडनी
बेच देता हैं .............
कभी बहता था उन नदियों में अम्रीत
तो हर कोई थाली को भेद देता है .....
एक जज मेरे देश में रकम के आगे
अपनी कुरषी बेच देता है ..........
एक पुलिसवाला सरेयाम
चोराहे पर अपना इमान बेच देता है .......
आज जला देते है उन्ही बेटीयों को
जिनके लिए एक बाप अपनी किडनी
बेच देता हैं .............
कभी बहता था उन नदियों में अम्रीत
आज उन्ही नदियों में खून बहता हैं
भगत
भगत
No comments:
Post a Comment